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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

कश्मीर नहीं समस्या

कौन  कहता है
कश्मीर कोई विवाद है
देश के अन्य राज्यों जैसा है
कहाँ कोई अपवाद है ?

कश्मीर को भी चाहिए
आजीविका के  अवसर
शांति का जीवन
स्वच्छ साफ़ परिसर

बच्चों को शिक्षा
बड़ों को रोजगार
बूढ़ों को आदर
महिलाओं को अधिकार

पर्यटकों की भीड़ 
डल में रौनक
दिलों में ख़ुशी
चेहरों पर चमक

बता दिया विश्व को
पिछले चुनाव में
ये अभिन्न है भारत से
नहीं अन्य प्रभाव में

समस्या है कश्मीर
पर कश्मीर में नहीं
किसी और ही मुल्क की
तकदीर में नहीं

कश्मीर का हर दल अब
सरकार चाहता है
कश्मीर की तरक्की
सौ बार चाहता है

इस बार की सरकार तो
गर काम यूँ करेगी
कश्मीर समस्या का
 इंतजाम यूँ करेगी

अलगाववादियों का
अलगाव वादियों से
ऐसा करेगी पुख्ता
ठहराव वादियों से

आतंकवादियों को
दहशत में ऐसी डाले
आतंक  से मरे सब
आतंक करने वाले


बुधवार, 24 दिसंबर 2014

माँ

ठन्डे पहाड़ों के बीच
बसा  वो छोटा सा शहर
कभी कोहरा कभी बादल
कभी वर्षा हर पहर !

इस ठन्डे शहर में
थी इक बड़ी हवेली
जिसमे बसती  इक दुनिया
दुनिया से अलबेली !

ठंडा आँगन ठंडी धरती
ठंडा था आसमां
इस ठंडेपन के बीच मगर
ऊष्मा थी प्यारी माँ !

उसकी ममता की निवाच में
सब कुछ ही सबका था
उस दिल की बड़ी रजाई में
सारा घर दुबका था !

सबसे पहले उठती थी माँ
सबकी खातिर उठती
छत  पर चौके में जाने को
सीढ़ी पहले चढ़ती !

चौके में चूल्हा एक तरफ
एक तरफ बनी  क्यारी
एक तरफ बैठ तकती सबको
माँ थी कितनी प्यारी !

बाबूजी रहते शांत सदा
जीवन बिलकुल सादा
माँ उनकी सेवा में रहती
बन घर की मर्यादा !

कितने बेटे कितनी बहुएं
कितने पोती पोते
सबका रखती वो ध्यान
हमेशा जगते या सोते !

वेदों ने माना मनु जीवन
जीवन सौ वर्षों तक
उत्तम जीवन जीने वाले ही
जीते पूर्ण शतक !

इन सौ वर्षों के जीवन में
इक दुनिया बना गयी
सौ लोगों के इस घर की
यादों में समा  गयी  !

माँ , आज तुम्हारा अभिनन्दन
करते हम सब बच्चे
तुम दूर कहाँ हमसे, माँ

कहते मन से सच्चे !

रविवार, 26 अक्तूबर 2014

पहाड़ पर



क्यों  लोग गर्मियों में जाते पहाड़ पर
शहरों से दूर रहने ऊंचे पहाड़ पर

सड़कों की चिल्ल पों से जब फट रहे हों कान
खामोशियों की खोज में जाते पहाड़ पर

आबोहवा शहर की जब जहर घोलती
अमृत को  ढूंढने  सब जाते  पहाड़ पर

हर वक़्त दौड़ता तन पैसे की दौड़ में
फिर वक़्त अपना ढूंढने जाते पहाड़ पर

रिश्तों  के मायने जब खो जाते शहर में
रिश्तों को फिर से जीने जाते पहाड़ पर 

सोमवार, 20 अक्तूबर 2014

सब के कद नप गए


चुनाव की भट्टी में सारे दल तप  गए
बड़ों के छोटों के सब के कद  नप  गए

बड़ी बड़ी हांकते थे जनता के आगे
जनता की आंधी में सारे ही खप  गए

जिनको परहेज था मोदी की बातों से
दोस्ती की चाहत में खड़े खड़े थक गए

जहर जो उगलते थे , आज फ़िक्र  करते हैं
बेवजह ही इतना तब किस लिए यूँ बक गए

रस्सियाँ तो जल गयी , बट  लेकिन बाकी है
बट सीधे होंगे कब , बंट बंट के बंट गए।





रविवार, 12 अक्तूबर 2014

अलग दिवाली


घर घर दीप जलायें 
अँधियारा मिट जाए। 


अंधियारे की आज देश में
बदल गयी परिभाषा
इस  बदले युग की हम सब से
भिन्न हुई है आशा

आओ हम सब इस दिवाली
कुछ  ऐसा कर जाएँ !


रहे देश का कोई बालक
शिक्षा बिन अधूरा
हर बालक  जो सपना देखे
सपना हो वो पूरा

हर नन्हे सपने को , नन्हे
पंख नए मिल जाएँ।

इस दिवाली  झाड़ू लेकर
सड़कों पर निकले हम
अपने शहर मोहल्ले का सब
कचरा दूर करें हम।

अपने घर की साफ़ सफाई
से आगे बढ़ जाएँ।

पटाखों का धूम धड़ाका
अब यह नहीं सुहाता
वायु  का प्रदूषण करता
कितना शोर मचाता

सीमा पर दुश्मन से लड़ने
अपना धन पहुँचायें। 



लक्ष्मी के पूजन की भी अब
बदल गयी परिपाटी
अपनी लक्ष्मी की कुछ राशि
यूँ समाज में बाँटी

धूप दीप नेवैद्य सभी के
जीवन को महकाए।

 
दिए जलाएं मिट्टी  के ही
तेल देश का भर कर
एक दिया अपने घर जलता
एक कुम्हार के घर पर

त्यागे सस्ती चीनी चीजें
देशी ही अपनाएं। 


मुठ्ठी मुठ्ठी दिवाली से
जगमग देश सजेगा
एक सौ तीस कोटि लोगों का
जीवन जब बदलेगा

दुनिया का सिरमौर बने यह
 अपना देश बनायें।

बुधवार, 1 अक्तूबर 2014

नमो बहुत खास है

नमो आम इंसान नहीं , नमो बहुत खास है
कितने सारे उदाहरण हमारे आस पास है

ओबामा ने नहीं दिया मोदी को वीसा
लेकिन मोदी ने दे दिया है पूरे अमेरिका को वीसा

पाकिस्तान ने अलापा अपना पुराने कश्मीरी झगडे का आलाप
मोदी ने कहा - बात करनी है तो अपनी करतूतें बात लायक करो

मोदी ने दिया ओबामा को मार्टिन लूथर किंग का ऐतिहासिक भाषण
ओबामा ले गए मोदी को मार्टिन की समाधि पर , अपने साथ

९० मिनट की वार्ता चली १४० मिनट तक
लगता है दोनों नेताओं के बीच समय की सीमायें समाप्त हो गयी

मोदी ने बात की हर मुश्किल विषय पर
लेकिन देश की प्राथमिकताओं को ऊपर रख कर

मेडिसन स्क्वायर के प्रांगण में भारतीय प्रवासी ही नहीं
दर्जनों अमेरिकी सीनेटर भी पहुंचे मोदी को सुनने

भारत और अमरीका मिल चुके हैं मंगल पर
एक बार फिर मिले हैं भारत और अमरीका मंगल के लिए

मोदी एक युग पुरुष है , जो भारत की तकदीर बदलेगा
भारत एक बार फिर विश्व का सिरमौर बन कर चलेगा 

बुधवार, 10 सितंबर 2014

विश्व विजेता


 इतिहास में विश्व विजेता था
यूनान का सिकंदर
जीता उसने विश्व
तलवार की नोक पर
खून  की नदियां बहा कर
लाशों से मैदान पटा कर
मिला क्या उसे -
एक खानाबदोश जिंदगी
लाखों  बद्दुआयें
एक अतृप्त अंत
एक शापित मौत !

आज हुआ है
एक और विश्व विजेता
जो जीत रहा है विश्व
पहला लक्ष्य
दुश्मनों को दोस्त बनाना
चीन हो या पाकिस्तान
सब को बढ़ाया
दोस्ती का हाथ
लेकिन इस चेतावनी के साथ
कि  ये है एक शक्तिशाली हाथ
दोस्तों की मदद के लिए
दुश्मनों के मुकाबले के लिए

जीत लिया पड़ोसियों को
बांग्ला देश हो या नेपाल
श्री लंका  हो या भूटान
छोटा हो या बड़ा
पडोसी सभी मित्र है

जन जन का दिल जीता
जापान में
जापान का धन आया हिंदुस्तान में
तोप तलवार से नहीं
दोस्ताना व्यवहार से

ऑस्ट्रेलिया चाहता है
भारत से सम्बन्ध
कर लिया यूरेनियम का अनुबंध

ओबामा गिन  रहा है दिन
भारी लग रहा है एक एक दिन
नरेंद्र मोदी की प्रतीक्षा है
मिलने की भरपूर इच्छा है
हवा हो गयी
वो वीसा न देने की बात
बिछी है लाल कालीन की सौगात

कौन कहता है
सिर्फ महलों में पैदा होते हैं
विश्व विजेता
भारत के गाँवों में
गरीबों के घर में
हर चाय बेचने वाला भी
देश का नेता है
विश्व विजेता है !




शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

शत शत वंदन देश तुम्हे !




















आजादी के महा पर्व पर 
शत शत वंदन देश तुम्हे !

कोई संकट कभी न आये 
चाहे दुश्मन चढ़ चढ़ आये
जो आये वो मुंह की खाये 
न हो कोई क्लेश तुम्हे !
शत शत वंदन देश तुम्हे !

ऐसा हो गणराज्य तुम्हारा 
जन गण मन का राजदुलारा 
दुनिया की आँखों का तारा 
दे आशीष गणेश तुम्हे !
शत शत वंदन देश तुम्हे !

नदियों का है ताना बाना 
भूमिगर्भ में दबा खजाना 
ऋतुओं का है आना जाना 
समृध्दि मिले हमेश तुम्हे !
शत शत वंदन देश तुम्हे !

दुनिया का सिरमोर बने तू 
शान्तिमार्ग की ओर चले तू 
थाम जगत की डोर चले तू 
प्यार मिले  हर देश तुम्हे !
शत शत वंदन देश तुम्हे !



रविवार, 25 मई 2014

मोदी है बस मोदी है।



रात अँधेरी भागी अब
भोर नयी इक जागी  अब
सूरज कितना तेज हुआ
सब हैरत अंगेज हुआ !

जो दिखते थे बड़े बड़े
ढेर हुए सब खड़े खड़े
ऐसी आंधी आई इक
खड़ा कोई न रहा तनिक !

वंशवाद के वंशज सब
कब्ज़ा कर के संसद तब
रहते थे निखरे निखरे
आज धरातल पर बिखरे।

जाति वाद के पोषक भी
जनता के थे शोषक भी
धता बताया जनता ने
दूर भगाया जनता ने।

बीज घृणा का बो बो कर
नकली आंसू रो रो कर
मजहब का नारा भी सब 
काम न आया उनके अब।

कदम कदम पर  शुचितायी
नगर नगर में सच्चाई
बात बात थी दर्पण सी
जन जन को थी अर्पण सी।

जीवन में सच्चाई थी
चिंतन में गहराई थी
मिटटी से निकला था वो
तप तप कर पिघला था वो।

दुष्प्रचार से घिरा हुआ
झूठ तंत्र से भिड़ा हुआ
सच से खुद को जोड़ दिया
उत्तर भी मुँहतोड़ दिया।

आज देश का नेता है
सबका बड़ा चहेता  है
भारत माँ की गोदी है
लाल नरेंदर मोदी है।

अच्छे दिन आने वाले
उनको है लाने वाले
गदगद आँखें रो दी है
मोदी है बस मोदी है।







 


 
 

मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

अब की है मोदी सरकार

बहुत हो चुका भ्रष्टाचार
बहुत हो चुका अत्याचार
भागो गद्दी छोड़ो अब
अब की है मोदी सरकार !

क्या इसको कहते सरकार ?
किसको है इसकी दरकार ?
मँहगाई से मर गया देश
अब की है मोदी सरकार !

बिना असर का था सरदार
जैसे रोबट सा किरदार
जिसे चलाता  जनपथ दस
अब की है मोदी सरकार !

राहुल करता है परचार
झूठी बातें बस हर बार
दस वर्षों तक झेल लिया
 अब की है मोदी सरकार !

करे सोनिया की जयकार
कांग्रेस में है भरमार
चमचों की ,मक्कारों की
अब की है मोदी सरकार !

देश की नैया है  मझदार
दिखती है बस एक पतवार
मोदी ही मल्लाह है
अब की है मोदी सरकार !

सोमवार, 17 मार्च 2014

बुरा न मानो होली है !

बुरा न मानो  होली है !
दस सालों की कई कहानी , अब तो पूरी हो ली है 
बुरा न मानो  होली है !

 कांग्रेस का नाम बदल कर "कौन कर ऐश " बना है अब 
देश की  दौलत लूट लूट कर नेता 'कैश' बना है सब
कांग्रेस ने अपनी सूरत ज्यों कालिख से धो ली है 
बुरा न मानो  होली है !
 
 मनमोहन थे अर्थशास्त्री , जग में नाम कमाया तब 
हो गए क्यों वो अनर्थशास्त्री , देश का नाम डुबाया अब 
ख़ामोशी की  चादर ओढ़े , सूरत कर ली भोली है 
बुरा न मानो  होली है !
 
राहुल थे एक दिवा स्वप्न से , कांग्रेस नित तकती थी 
सपने चकनाचूर हुए अब , बेमतलब की  भक्ति थी
ऊपर से जैसी हो बातें , अंदर से सब पोली है 
 बुरा न मानो  होली है !





 
अन्ना थे जन जन के हीरो , कैसी लाये आंधी थे 
लोग  कहा करते थे - भैया, दूजे बापू गांधी थे 
ममता के चक्कर में पड़  कर जग में बने ठिठोली है 
बुरा न मानो  होली है !




और केजरीवाल अचानक, उठे क्रांति की  ज्वाला से
सत्ता की  चाहत में बिखरे , जैसे टूटी माला से 
वोट मांगते फिरते निशदिन ये फैलाये झोली है 

बुरा न मानो  होली है !
 








 

आरोपों के दलदल से जो, निकला बनकर नायक सा 
अब दल दल हैं कोरस गाते , वो जब गाता गायक सा 
अगले युग  का नेता मोदी , भारत की ये बोली है
बुरा न मानो  होली है !













 

 


सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

कुछ नयी परिभाषायें

आम आदमी 

वो मूर्ख सा व्यक्ति 
जिसकी अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती 
जो 
सिर्फ एस एम एस के द्वारा 
हाँ या ना में अपनी राय देता है
भ्रष्टाचार

सभी राजनैतिक दलों 
का एक गुप्त 
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम
मिडिया 

ऐसी बन्दूक 
जिसका लाइसेंस तो है 
लेकिन 
रोक टोक नहीं
तीसरा मोर्चा 

कई पैबंद मिला कर 
एक कमीज 
सिलने का प्रयास
चुनाव 

पांच सालों के लिए 
एक नयी 
बेकार सरकार 
चुनने की  प्रक्रिया
न्यूज़ एडिटर ( टीवी )

चीख चीख कर 
दूसरों को चीखने से 
रोकने वाला 
अंतिम वक्ता
अफवाहें 

बिना दस्तखत के 
हवा में उछाले  हुए 
मुट्ठी भर शब्द

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

माँ




माँ -सबसे छोटा शब्द
लेकिन सबसे वृहद् रूप
श्रष्टि का आधार
सृजन का स्वरुप

ममता का सागर
धैर्य का सिंधु
सर्वोपरि रक्षक
सर्वप्रिय बंधु

बिना शर्त साथ
सर पर है हाथ
असीमित प्यार
निरंतर दुलार

न कोई अपेक्षा
न कोई परीक्षा
अपनी संतान
जीवन कुर्बान

बुधवार, 1 जनवरी 2014

नये साल की परिभाषा

नया सूरज , नयी किरणे
नयी खुशबू , नयी कलियाँ
नया दिन है , नयी आशा
नये  सब कुछ की  अभिलाषा

नया जीवन , नया मौसम
नए सुर है , नयी सरगम
नए नगमे , नयी नज्मे
उमंगें हैं नयी जिन में

नयी उम्मीद हैं कल की
नयी इच्छाएं पल पल की
नए कुछ स्वप्न भी होंगे
जड़े कुछ रत्न भी होंगे

उदासी दूर भागेगी
निराशा  पास ना  होगी
ग़मों की  रात खोएगी
कोई आँखें न रोयेगी

बीस तेरह को भूलेंगे
बुरा वो साल भूलेंगे
बीस चौदह जो आया है
नया इक जन्म लाया है 

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

आम आदमी का नया साल

नया साल खुशहाली लाये 
नल से  पानी कभी न जाए  
सुबह सवेरे रोज नहाएं
ताजा हो दफ्तर को जाएँ
बस की लाइन भी छोटी हो
पेंडिंग फ़ाइल न मोटी हो
बॉस प्यार से ही बतियाएँ
और जरा तनख्वाह बढ़ाएं
और शाम को घर जब आयें
घर में पंखा चलता पाएं
गर्मी में बिजली न जाए
बिजली का बिल पर घट  जाए
राजनीति में भी तबदीली
'आप ' ने जैसे छीनी  दिल्ली
वैसे ही सत्ता की  गोदी
में आ जाएँ पी एम मोदी
बलात्कार का नाम न होवे
भ्रष्टाचार से काम न होवे
नए साल में जो हो भैया
कांग्रेस का नाम न होवे 

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

देश का इतिहास

बहुत से लोगों ने देश का इतिहास लिखा है
सब ने कुछ न कुछ ख़ास लिखा है
इतिहास लिखा था महात्मा गांधी ने
बिना हथियार के लड़ी आंधी ने

अनाथों को दिया माँ का सा आभास
लिखा था मदर टेरेसा ने इतिहास
रविंद्रनाथ टैगोर ने लिखी गीतांजलि
इतिहास की  किताब की कड़ी बन मिली

आवाज की  दुनिया की मलिका  ऐ खास
लिखा लता मंगेशकर ने इस देश का  इतिहास
व्यक्तित्व और अभिनय से दिलों पर किया राज
इतिहास लिख रहें है बच्चन अमिताभ

इसी  श्रंखला में इतिहास लिख रहें हैं
दुनिया के लोगों के दिल में बस रहें हैं
लिख सकता है इतिहास कोई बल्ला घुमा कर
पूरा करेंगे इतिहास आज सचिन तेंदुलकर

शनिवार, 2 नवंबर 2013

एक दिया उनको भी दो

( मेरे दादाजी स्वर्गीय लालमन जी की एक रचना )

जिनके घर उजियार घनेरा - एक दिया उनको भी दो
जिनके घर में अधिक अँधेरा - एक दिया उनको भी दो

होली दीवाली क्या जाने वो - अन्न न एक समय जिनको
एकादशी लगाती फेरा - एक दिया उनको भी दो

जिनके घर का आसमान छत - और धरती ही आँगन है
है केवल चंदा का उजेरा - एक दिया उनको भी दो

महलों की तो दूर जिन्हे - झोपड़ियों की भी आस नहीं
फुटपाथों पर जिनका डेरा - एक दिया उनको भी दो

कहे रात की क्या दिन में भी - भटक रहे अँधेरे में
मानो कहा आज तुम मेरा - एक दिया उनको भी दो

शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2013

बे-चारा लालू










विश्वास नहीं  होता
ऐसा भी होता है
भारत का नेता भी
अब अन्दर होता है

कितना भी धूरत हो
कितना भी हो चालू
चाहे मिश्रा  जग्गू
चाहे यादव लालू

अपराध कहाँ था वह
बस खाया था चारा
चोरी गौ माता से
लो फंस गया बेचारा

चुपचाप सह गयी वो
भोली भाली  गैय्या
चोरी करने वाला
ग्वाला ही था भैया

दिन उलटे पड़  गए तब
लालू चुनाव हारा
सरकारी चमचा बन
फिरता मारा  मारा

फिर कांग्रेस ने भी
है झाड लिया पल्लू
लालूजी से अब
वो बन गया है लल्लू

सर्कार सहारे तो
ये  देश बेचारा है
न्यायालय ही अब तो
बस एक सहारा है    

बुधवार, 28 अगस्त 2013

कहाँ मुंह दिखा पायेगा ?


आशाराम बापू !
बहुत खूब नाम रखा तूने !
आशा - यानि भविष्य की उम्मीद
राम - यानि मर्यादा पुरुषोत्तम राम
बापू - माँ  शब्द के बाद वात्सल्य की पराकाष्ठा !

तीनों नामों को बदनाम किया
गाय की खाल में भेड़िये  का रूप ?
बहुत व्याख्यान दिए तूने -
ईश्वर  पर , भक्ति पर
अंतर की शक्ति पर
परिवार के प्यार  पर
मानव के व्यवहार पर

भविष्य की प्रतीक वो बच्ची आई थी तेरे द्वार
पाने को तेरा आशीर्वाद , तेरा दुलार
तूने क्या दिया  उसे
वहशीपन , दरिंदगी !

जिंदगी भर राम के नाम पर
रोटियां सेकी तुमने
क्या क्षण भर को भी  उस राम का भय नहीं लगा
जब उतारे तुमने उस मासूम के कपडे

बापू - कहाना चाहते थे न तुम अपने आप को ?
क्या ऐसे होते हैं बापू ?
तेरी अंधश्रद्धा में फंसे उस परिवार को
बना लिया निवाला अपने चर्म सुख का

तू तो बुरा निकला एक वेश्या से भी
क्योंकि एक वेश्या ढोंग नहीं करती वो होने का
जो वो है नहीं
और न ही वो न होने का
जो वो है

कहाँ मुंह दिखा पायेगा ?
न इस लोक में
न उस लोक में

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

रूपया कहाँ गिर रहा है

कौन कहता है -
रूपया गिर रहा है
गिर तो रहा है आदमी
गरीबी की रेखा से नीचे
ऊपर जाती है कीमतें
नीचे आती है ये रेखा !

रूपया कहाँ गिर रहा है
गिर तो रही है साख इस देश की
सिरमौर बनने  का ख्वाब देखते देखते
सर  उठाने लायक भी नहीं रहे


रूपया नहीं गिर रहा मेरे भाई
गिर रही है इस देश की राजनीति
स्कूल में जहर खा कर मरे  बच्चों पर राजनीति
उत्तराँचल की त्रासदी पर राजनीति
बिहार की रेल से पिसे लोगों पर राजनीति
बलात्कारों पर राजनीति
हत्यारों पर राजनीति
चीत्कारों पर राजनीति
हाहाकारों पर राजनीति

गिर रहा है मनोबल देश का
गिर रहा स्वाभिमान देश का
पाकिस्तान से पडोसी धमकाते हैं
चीन से सीमा पर गुर्राते हैं

सब कुछ गिर रहा है पर वो क्यों नहीं गिरता
क्यों नहीं गिरता - जिसके कारण सब कुछ गिरता
रही नहीं इस देश को दरकार जिसकी
वो गिरती क्यों नहीं सर्कार इसकी

बुधवार, 17 जुलाई 2013

खुदा खुद तेरे अन्दर है










पहाड़ों में उसे ढूंढें
मजारों में उसे ढूंढें
जो दिल के पास हो रहता
नजारों  में उसे ढूंढें

कोई काबा को जाता है
कोई गंगा नहाता है
कोई खतरों से लड़ लड़ के
यूँ बद्रीनाथ जाता है

मदीना और मक्का हो
नमाजी  कितना पक्का हो
खुदा को ढूंढता रहता
हमेशा  हक्का बक्का हो

कोई अरदास करता है
कोई उपवास करता है
मगर साहब नहीं मिलता
ग्रन्थ का पाठ  करता है

अगर अल्लाह वहां होते
अगर ईश्वर  वहां होते
न मरते लोग हज जाकर
पहाड़ों में नहीं खोते

उत्तराखंड खंडित है
यहाँ हर भक्त दण्डित है
ये पूजा की  सभी जगहें
मात्र   मानव से मंडित है

खुदा खुद तेरे अन्दर है
तेरा मन ईश  मंदर है
सफाई कर ले अन्दर की
 तभी जीवन ये सुन्दर है




मंगलवार, 25 जून 2013

विभीषिका और राजनीति

पृकृति का तांडव पूरे जोर पर है
विनाश अगले छोर पर है
खंड  खंड हो रहा उत्तराखंड
इश्वर दे रहा न जाने कौन सा दंड
हजारों लोग - भक्त उपासक
फंसे बाढ़ में विनाशक
पूरे देश में हाहाकार है
कितने ही घरों में चीत्कार है
सेना के जवान प्राणों की बाजी लगा कर
बचा रहे सबको खुद को फंसा कर
देश कर रहा प्रार्थना हाथ जोड़े
भाग रहें समय के घोड़े

ऐसे  में राजनीति की क्या दरकार है 
कितनी असम्वेदनशील ये सर्कार है 
कितनी डरी  हुई- मोदी नाम के व्यक्ति से
उस की जांबाजी से उसकी शक्ति से 
उसकी यात्रा नहीं चाहिए
उसकी सहायता नहीं चाहिए 
उसके हेलिकोप्टर नहीं चाहिए 
उसका कुछ भी नहीं चाहिए 
लेकिन समझती नहीं है एक बात 
कैसे बदलते हैं हालात 
जितनी बार उसको ना  बोलोगे 
उतनी बार उसका नाम तो लोगे 
जितना उसको रोकोगे 
जितना उसको टोकोगे 
उतना वो आगे बढेगा 
उतना वो ऊपर चढ़ेगा