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गुरुवार, 18 मई 2017

निर्लज्ज पाकिस्तान



हारे , थके , पिटे हुए देश तुम
तुम्हे आत्मग्लानि क्यों नहीं होती
जिस देश से भीख मांग कर अलग हुए
उस देश के साथ लड़ते रहते हो
लड़ते भी कहाँ हो , कायर जो ठहरे
चूहों की तरह बिल से निकलते , हो कुतरने के लिए
बात करते हो मजहब की
मारते हो कश्मीरियों को
बनते हो उनके रहनुमा
पत्थर के खिलोने बांटते हो
सफ़ेद दाढ़ी की आड़ में
काला दिल पालते हो
और खिसियानी बिल्ली की तरह
दबोच लेते हो कुलभूषण से आम आदमी को
और फिर देते हो यातनाएं
फाँसी का फंदा बना लिया तुमने
अपनी खीज का खम्बा नोचने के लिए
आज दुनिया देखेगी तुम्हारी कारस्तानी
जब अंतर्राष्ट्रीय अदालत फैसला सुनाएगी
फंदा तुम्हारा तुम्हारे लिए ही होगा
नए बहाने ढूंढने शुरू कर दो




शनिवार, 22 अप्रैल 2017

इति विपक्ष एकता प्रकरणम

विपक्षी दलों की एकता

आपने भी पढ़ा होगा की दो दिन पहले नितीश कुमार  श्रीमती सोनिया गाँधी से मिलने गए । मुद्दा था - राष्ट्रपति चुनाव में पूरा विपक्ष एक होकर अपना उम्मीदवार उतारे। सब कुछ तो मीडिया को भी पता नहीं होता। ये रही अंदर की बात -

नितीश - सोनिया जी , आज मैं एक खास मुद्दे पर आपसे बातचीत करने आया हूँ ; मेरा प्रस्ताव है की हम सभी विपक्ष के लोग एकजुट होकर राष्ट्रपति पद का एक उम्मीदवार चुने और मोदी जी के कैंडिडेट को हरा कर उनका घमंड चकनाचूर करें।
सोनिया - आपका विचार अच्छा है , लेकिन क्या मेरे को कैंडिडेट बनाने से मेरा फोरेन रूट का प्रॉब्लम नहीं आएगा ?
नितीश - बिलकुल आएगा , वर्ना आपसे अच्छा कैंडिडेट कौन होता ! वैसे लालूजी भी बहुत इंटरेस्टेड हैं , लेकिन उनको सबका समर्थन नहीं मिलेगा।  मेरे बारे में आपका क्या ख्याल है ? लोग मुझको पसंद करते हैं।

( तभी लालू का प्रवेश )
लालू - क्यों नितीश भाई , आपने चर्चा कर ली हमारे नाम की ?
नितीश - (फुसफुसा कर ) - मैडम ने ना कर दिया है।
लालू - क्यों मैडम ? जब भी कांग्रेस पर संकट पड़ा है , हमने आपका साथ दिया है।
सोनिया - संकट भी तो आपके कारण पड़ा है !

( अखिलेश का प्रवेश )
अखिलेश - सब को पिताजी की तरफ से नमस्ते !
लालू - और तुम्हारी तरफ से ?
अखिलेश - अंकल , हमारी नमस्ते कौन सुनता है ? यू पी  के चुनाव के बाद से ही हम दोनों नौजवानो के सितारे गर्दिश  में है।
सोनिया - तुमने राहुल को बिना मतलब फँसाया !
अखिलेश - आंटी , जाने दें , किसको किसने फँसाया। फिलहाल मैं एक दरख्वास्त लेकर आया हूँ। जब से हम यू पी चुनाव हारे हैं , पिताजी बौखला गये हैं। हारने का कारण मुझे बताते हैं ; जबकि सच्चाई ये है कि मेरे कारण उनकी इज्जत बच गयी ; वर्ना मुख्यमंत्री वो भी होते तो हारना निश्चित था। जहाँ तहाँ मेरे बारे में उल्टा सुलटा बकते हैं। उनके साथ बैठकर शिवपाल अंकल उन्हें भड़काते हैं।
लालू - भैया , ये तो तुम्हारा आतंरिक मामला है तुम्ही निपटो। ऐसे सभा सोसाइटी में समधी जी की टोपी मत उछालो।
अखिलेश - अरे नहीं लालू अंकल , हम तो बस ये अनुरोध लेकर आये हैं , की  आप सब मिलकर उनको राष्ट्रपति का कैंडिडेट बना दो , तो हमारी जान छूट जाये।
सोनिया - इम्पॉसिबल ! मुलायम वाज  वैरी हार्ड ऑन  राहुल। उसने कांग्रेस के  बारे भी  ग़लत बोलै।

( सीताराम येचुरी का प्रवेश )

सीताराम - कम्युनिस्ट पार्टी का कैंडिडेट बनूँगा मैं। कम्युनिस्ट पार्टी ने कभी कोई पद नहीं माँगा।  बल्कि ज्योति बाबू को प्रधानमन्त्री  बनने से भी रोका।  हमेशा आप लोगों का साथ दिया।  हमारा पोलितब्यूरो ने फैसला किया है ,  कि देश का राष्ट्रपति मुझे बनाया जाय।

(अचानक ममता का प्रवेश )

ममता - अच्छा अब गुण्डो की पार्टी को भी राष्ट्रपति बनना है।  तुमलोगों ने पश्चिम बंगाल को बरबाद कर दिया , अब क्या हिंदुस्तान को बर्बाद करोगे।

(मायावती का प्रवेश )

मायावती - कभी तो दलितों की महिला को भी चांस दो ! मैंने फैसला किया है,  कि अब मैं यूपी की चुनावी राजनीति से सन्यास ले लूँ।
अखिलेश - अरे बुआ , सन्यास तो तुम्हे मोदी जी ने दिला दिया। तुम अपने  भतीजे को गलियाती रह गयी , वो हम दोनों की बजा के चला गया।

तभी सम्बित पात्रा का प्रवेश -

संबित - मुझे मोदीजी ने एक सन्देश देकर भेजा है , की इस बार हमलोग एक नयी मिसाल पेश करेंगे।  हमलोग इस बार किसी विरोधी पार्टी के किसी समझदार वरिष्ठ  नेता को राष्ट्रपति  उम्मीदवार बनाएंगे।  अगर आप लोगों ने कोई उम्मीदवार चुन लिया हो तो उन्हें खबर कर देना।

ऐसा सुनते ही सारे नेता भाग लिए सभा से।  अपनी चिर परिचित कुटिल मुस्कान के साथ संबित्त भी वहां से निकल लिए।
                                          
इति विपक्ष एकता प्रकरणम

रविवार, 1 जनवरी 2017

Happy New Year India !



सोलह का साल बड़ा बेमिसाल था
रोज हो रहा कुछ न कुछ कमाल था !

म से जुड़े लोग - बड़े शोर में रहे
मोदी , ममता , माया, मुलायम जोर में रहे
महबूबा बन सकी न किसी की भी महबूबा
इतना उसके दिल में हर पल मलाल था


अ से बने नाम थे बस दाल दल रहे
अखिलेश, अमित, अमर सिंह चाल चल रहे
अरविन्द जंग छेड़ते रहे यूँ रोज जंग से
दिल्ली को छोड़ दूर  छाने का ख़याल था


नोट बंद हो गए पांच सौ हजार के
लाले पड़े जनता के  खर्चों के जुगाड़ के
बेईमान है चिल्ला रहे , ईमानदार खुश
मोदी ने लिया देशहित निर्णय विशाल था


संसद का समय मूर्खता की भेंट चढ़ गया
संसद का सत्र बिन बहस आगे को बढ़ गया
इस खेंच तान में ये साल ख़त्म हो गया
नुकसान हुआ देश का , किस को मलाल था


रविवार, 25 दिसंबर 2016

Happy new Year !!!


मन की बात

 ये साल यूँ जा रहा है
जैसे की ५०० और हजार के नोट !
एक साथ ही दोनों का विसर्जन
३१ दिसंबर को !

फिर नया साल आएगा
पता नहीं क्या नया लाएगा
सांता क्लॉज की तरह टीवी पर आएंगे
मोदीजी कुछ बतलायेंगे !

दिल थाम कर सुनना
खोलेंगे अपना पिटारा
सबकी सुनेंगे और सुनाएंगे
कौन जीता कौन हारा

फिर एक दिन होगी नयी सौगात
जब मोदीजी कहेंगे मन की बात
कष्ट के दिन जाएंगे
अच्छे या बुरे का तो पता नहीं
लेकिन कुछ अलग से दिन आएंगे !


रविवार, 27 नवंबर 2016

सर्जिकल स्ट्राइक




पाकिस्तान पर जो हुआ

वो सर्जिकल स्ट्राइक का रिहर्सल था

नवम्बर को जो हुआ वो असल था !



घर बैठे ही सब के यहाँ रेड पड़  गयी

डिनर पर न्यूज़ देखने वालों की भूख मर गयी

छापा टीवी पर बोल के ही मार दिया

दारु वालों का नशा  उतार दिया



उस रात लोग गिनते रहे हजार और पांच सौ के

छुपा कर जो बचाये थे मियां बीवी ने एक दुसरे  से

सब का वोलंटरी डिस्क्लोजर हो गया

बरसों की चोरी का एक्सपोजर हो गया



नोट के ढेरों को टेबल पे रख के

लगे सोचने यूँ माथा पकड़ के

इस माया को ठिकाने लगाएं कहाँ

जाए तो आखिर जाए कहाँ ?



नोटों पर ये जो दिखा  है

धारक को हजार पांच सौ देना लिखा है

इसमें अब लिखो एक सफाई

कंडीशन्स अप्लाई



ये नोट काला है या सफ़ेद - बताओ

इसपर कोई तो निशान लगाओ

जिससे भविष्य में तो बचाव रहे

जीवन में खिंचाव रहे



प्रधानमंत्री का उत्तर स्पष्ट है 

अगर तुम्हारे अंदर कपट है

तो है तुम्हारा नोट काला

वर्ना चाँदी सा उजाला



नोट काला या सफ़ेद नहीं होता है मित्र

काला या सफ़ेद होता  है चरित्र

अगर देश का हक़ मारा

तो फिर नोट नहीं है तुम्हारा



जीवन में परिवर्तन लाओ

पैसा चाहे जितना भी कमाओ

देश को उसका टैक्स चुकाओ

फिर चाहे मखन मलाई खाओ !

सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

Naman







नमन


रंगोली है वहां , रंगोली है यहाँ
कभी होली है वहां , कभी होली है यहाँ

बारूद है वहां , बारूद है यहाँ
बम फटते  हैं वहां , बम फटते हैं यहाँ

जुआ भी है वहां , जुआ भी है यहाँ
प्राणों का दांव वहां , पैसो का दांव यहाँ

अंतर बस इतना है , अंतर बस इतना है
सीमा पर वो खड़े , शहरों में हम पड़े

दिवाली देश में हो , दिवाली देश में है
वो वहाँ प्रतिक्षित हैं , हम यहाँ सुरक्षित हैं

[ दिवाली के अवसर पर भारत की सेना को हमारा नमन !]

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

Chahiye praman !


चाहिए प्रमाण ?

हम ने लड़ा दिए प्राण
तुम्हे चाहिए प्रमाण
इस बार नहीं दे सकेंगे
क्योंकि इस बार
हम में से कोई नहीं मरा
उनके जो मरे
उन्हें हम ला नहीं पाए।

ऐसी अग्नि परीक्षा तो
सीता ने भी नहीं दी थी
हमसे हमारे जीने का हिसाब मांगते हो
जो आज से पहले किसी ने नहीं माँगा
तुम तोपों में पैसा खा गए
तुम हमारे हेलीकोपटरों में दलाली खा गए
हमने तो नहीं माँगा कभी हिसाब
क्योंकि नहीं रखी कोई किताब


हमेशा से सीखा  था
जन्मभूमि माँ होती है
और माँ के दूध का हिसाब नहीं होता है !
फिर भी देंगे तुम्हे जवाब
साथ में देंगे हिसाब
जब कभी हमारी वर्दी में मांगने आओगे
नहीं तो , माँ कसम
बहुत मार खाओगे !

सोमवार, 15 अगस्त 2016

मैं कैसे तुम्हे मनाऊं मेरी आज़ादी !





मैं किस मुंह से आज़ादी तेरी बात करूँ

मैं कैसे मानूँ देश मेरा आज़ाद है अब !

गोरे  अंग्रेजों से तो हम आज़ाद हुए

काले अंग्रेजों से भी तो  बर्बाद हैं अब !



जिस मज़हब वाले मुद्दे पर था देश बंटा

वो ही मज़हब वाला झगड़ा फिर शुरू हुआ

संसद  पर हमले करने वाला अफ़ज़ल वो

क्योंकर इक हिस्से का वो जाने गुरु हुआ ?



मुम्बई का करने को  विनाश जो आया था

कुत्ता था , खुद को टाइगर वो कहता है 

उसके भी चाहने वाले हैं इस भारत में

जो  पकिस्तान में छिप चूहे सा रहता है !



गौरक्षा की है बात उठाना जुर्म यहाँ

गौहत्या अब इस देश में बहुत जरूरी है

भारत माँ  को माता कहने पर कष्ट यहाँ

इस देश को अपना कहना भी मजबूरी है !





आतंकवाद घुस कर बैठा हर कोने में

जैसे शोणित में मिले हुए कीटाणु से

कैंसर बन कर इस देश की जड़ को काट रहे

कब फूट पड़े बन कर बम वो परमाणु से !



खुद को आज़ादी के मालिक कहने वाले

क़दमों में पड़े हुये हैं देखो इटली के

जब चूस चुके हैं देश की सत्ता का  सब रस

अब भी हैं देखो चाट रहें हैं  गुठली वे



इस देश में नहीं सुरक्षित देखो नारी अब

डर डर  कर रहती बहुसंख्यक जो आबादी

मैं चाहूँ भी तो कैसे झंडा फहराऊं

मैं कैसे तुम्हे मनाऊं मेरी आज़ादी !


रविवार, 7 अगस्त 2016

मेरी दोस्ती मेरा प्यार


रिश्ते वो हैं जो जन्म के कारण बनते हैं

दोस्ती वो जो जीवन के कारण  बनती है



सरे राह चलते कोई मिल गया

दो चार बाते हुयी

कुछ मैंने कही उसने सुनी

कुछ उसने कही मैंने सुनी

और अनजाने ही एक दोस्ती शुरू हो गयी !



मैं हिन्दू था , वो मुसलमान निकला

पूर्वाग्रह था - मुसलमान अच्छे नहीं होते

फिर भी वो अच्छा लगा

शायद उसके भी मन में ऐसा था कुछ

फिर भी मैं उसे अच्छा लगा



उसे भी फ़िल्में , उपन्यास और कविताएँ पसंद थी

और मुझे भी

हमने साथ साथ न जाने कितनी फ़िल्में देखी

कितना संगीत सुना

कितने उपन्यास आपस में बदले

दोस्ती और गहरी होती गयी



उसने ईद पर मुझे बुलाया

मैं झिझका ; हमारा खाना पीना जो अलग था

उसे मेरी झिझक का पता था

उसने मेरे लिए अलग बर्तन मंगाये

शुद्ध शाकाहारी भोजन खिलाया



मुझे अपनी झिझक पे झिझक आयी

हम दोनों साथ साथ होटलों में खाते हैं

तब क्योँ नहीं ये झिझक आड़े आती

हवाई जहाज में कौन नए बर्तन में खाना बनाता होगा

इस सोच से दोस्ती और मजबूत हो गयी



दिवाली पर मैंने उसे बुलाया

वो नए कपडे पहन कर आया

माँ ने बड़े प्यार से उसका भी थाल सजाया

उसे हमारी दिवाली पसंद आयी

दोस्ती और मजबूत हो गयी



इस दोस्ती को इकतालीस साल बीत गए

सालों साल मिलना नहीं होता

लेकिन दिलों में दोस्ती अभी भी ताजा है

क्योंकि दोस्ती वो रिश्ता है

जो सभी रिश्तों का राजा है !