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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

बिना चेहरे वाली औरत

आखिर एक औरत ने दम तौड़ दिया
उस औरत का कोई चेहरा नहीं है
उसका कोई नाम भी नहीं है
एक शरीर था, आज वो भी नहीं है
किसी ने कह दिया 'दामिनी'
किसी ने कह दिया ' निर्भय'
लेकिन हकीकत ये है -
कि वो थी बस एक औरत
और उसके मरने का कारण भी यही था
यही कि  वो थी एक औरत
चंद लोगों के लिए होता है औरत का अर्थ शरीर
वो शरीर जिसकी प्रजनन की क्षमता से चलती है सृष्टि
वो शरीर जो एक शिशु का निर्माण करता है
वो शरीर जिसके अन्दर से जन्म लिया था उन दरिंदों ने भी
उन्होंने  अपमान किया उसी प्रजनन क्षमता का 
थूक दिया अपनी ही माँ की कोख पर 
जो आज शर्मिंदा  होगी अपनी संतान पर
विदा हो गयी वो औरत
वो बिना नाम बिना चेहरे वाली औरत
एक क्षण को अपनी माँ , बहन, पत्नी या बेटी का चेहरा 
लगा कर देखो  उस बिन चेहरे वाली तस्वीर पर
उनका नाम लिख के देखो उस तस्वीर के नीचे 
फिर देखो कैसे काँप  जाती है आत्मा
इस तस्वीर को बसा लो अपने अन्दर
ताकि जब कभी भी तुम्हारे अन्दर जागे
कोई वहशी दरिंदा
उसे नजर आ जाये ये तस्वीर
बिना नाम बिना चेहरे वाली

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

गैंग रेप


सुनसान था रास्ता
अँधेरी थी रात
दिल्ली शहर की
एक सड़क
सड़क पर जा रही थी एक लड़की
सामने से आ रहे थे कुछ लड़के
लड़की सहमी
लड़के लडखडाये
और फिर शुरू हो गया
एक ग़जब जा परिवर्तन
दिल्ली जैसे बदलने लगी
एक घनघोर जंगल में
सड़क एक पगडण्डी में
लड़की अपने आप में सिमटी
बन गयी एक ताजा मांस का लोथड़ा
उन लड़कों के जैसे  निकल आये सींग
आँखों में वहशीपन और मुंह से लार
हाथों के नाख़ून बन गए लम्बे लम्बे चाकू
मुंह के दांत निकल आये व्याघ्र की तरह
और फिर घेर लिया उन जानवरों नें
अपने शिकार को
जख्मी किया उसके शरीर को
लहुलुहान किया उसकी आत्मा को
फेंक दिया उसकी जिन्दा  लाश को पेड़ों के पीछे
बस खाया नहीं वो मांस
पिया नहीं लहू
आखिर इंसान जो थे !

शनिवार, 10 नवंबर 2012

आओ दीप जलाएं

 
आओ दीप जलाएं 
पहला दीपक आपके स्वास्थ्य के लिए 
दूसरा आपकी समृद्धि के लिए
तीसरा परिवार में सद्भाव के लिए
चौथा समाज में सौहार्द के लिए
पांचवा देश में शांति के लिए
छठा विश्व के कल्याण के लिए
और सातवाँ ब्रह्माण्ड में समन्वय के लिए
 
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें 
 स्वीकार करें !
 
आपका स्नेही
महेंद्र आर्य
 
919821021323

सोमवार, 5 नवंबर 2012

लुप्त हास्य

श्रोता कहते हैं - कुछ मजा लाओ
जरा हास्य सुनाओ
भई,  हास्य कहाँ से लाऊँ 
जो आपको सुनाऊँ 
हास्य जीवन से हो चुका है लापता
जिसका कोई अता पता

हास्य लिखते थे लीडरों पर 
दहाड़ते हुए गीदड़ों पर
नेताओं की बातों पर
उनकी करामातों पर   
लेकिन अब तो राजनीति नाम का शब्द 
हो चुका है बिलकुल हास्यास्पद 
हंसने की जगह रोना आता है 
जब कोई किसी राजनेता पर कविता सुनाता है

प्रधानमंत्री मौन हैं
पद हुआ गौण  है
कहने को प्रधानमंत्री हैं
वास्तव में प्रधान संतरी हैं
सोनिया जी की सुरक्षा में  
राहुल जी की रक्षा में
बबुए से दिखते  हैं
मन ही मन खिजते  हैं
आँखों पर पट्टी है
कानों में मट्टी है


सोनिया  जी  लीडर हैं
भाषण में रीडर हैं
सजधज के रहती है 
जो कुछ भी कहती हैं
लिखता  कोई दूजा है
मुंह इनका सूजा है
थोड़ी कुम्हलाई है
मन में घबरायी है
लफड़े में फंसा है
आजकल जमाई है

राहुल जी युवा हैं
बस इतना हुआ है
इसके अलावा इन ने 
कुछ भी  छुआ है
यु पी के चुनाव में
बैठे थे नाव में
नैय्या जब डूबी थी
कोंग्रेस की खूबी थी
राहुल को बचा लिया
सब को डुबा दिया
गाँधी परिवार है
इसलिए दरबार है
वर्ना ये आदमी बिलकुल बेकार है  


एक  हैं सलमान भाई
एक था टाइगर वाले नहीं
मंत्री कानून के
पद के जूनून के  
कानून के रखवाले
बोले मेरे इलाके में  के दिखाले 
जितना हो तुझ में दम 
आना तो तेरे हाथ में है
लेकिन जाने  देंगे हम
और इस गुंडागर्दी का मिला उन्हें फल 
खुर्शीद साहब की तरक्की हुई 
विदेश मंत्री है आजकल

किस पर हँसे हम
खुद ही फंसे हैं हम
रोज का अख़बार है
भरा भ्रष्टाचार है
बढती महंगाई है
घटती कमाई है  
टैक्सों की मार है
चोरी व्यापार है
पुलिस पैसे खाती है
फिर भी हड़काती है
पिछले साल  एक दिन 
याद है वो एक दिन
हंसा था मैं जोर से 
और अधिक जोर से 
एक ट्रक पर लिखा था  
मुझको दिखा था
उस पर एक नारा था
बहुत ही प्यारा था
सौ में से नब्बे बेईमान 
फिर भी मेरा भारत महान