दुखों के जंगल में
सुख की पगडण्डी है
चौराहा उलझन का
निर्णय की मंजिल है
कुछ अनजाने डर से
रातें अन्धियायी है
चिंताओं की रेखा
माथे पर छाई है
फिर भी राहें दिखती
बिजली की तड़पन से
डर भी मिट मिट जाता
पत्तों की खडकन से
राहों में शूल बिछे
अनबूझी मुश्किल के
शूलों में फूल खिले
खुशियों के दो पल के
पग में कांटे चुभते
जीवन के वादों के
पावों में जूते हैं
मजबूत इरादों के
सुख की पगडण्डी है
चौराहा उलझन का
निर्णय की मंजिल है
कुछ अनजाने डर से
रातें अन्धियायी है
चिंताओं की रेखा
माथे पर छाई है
फिर भी राहें दिखती
बिजली की तड़पन से
डर भी मिट मिट जाता
पत्तों की खडकन से
राहों में शूल बिछे
अनबूझी मुश्किल के
शूलों में फूल खिले
खुशियों के दो पल के
पग में कांटे चुभते
जीवन के वादों के
पावों में जूते हैं
मजबूत इरादों के