कोई चुपके से मेरे कानों में यूँ कुछ कह गया
आँख के पीछे थमा सारा समंदर बह गया
दर्द की नीवों पे कितने पत्थरों के दुर्ग थे
इक जरा जज्बात के झोंके से सब कुछ ढह गया
मैं समझता था कि मेरा ख़त्म सब कुछ हो चुका
फिर भी सीने में धडकता दिल बेचारा रह गया
सह ना पाया प्यार के जज्बात के दो बोल मैं
वक़्त के हालात के चुपचाप थप्पड़ सह गया