Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

मंगलवार, 30 अगस्त 2022

गुलदस्ता अंक -६

गुलदस्ता संख्या -६ 

नमस्कार मित्रों ! आप सब के प्रोत्साहन के कारण हमारा गुलदस्ता निरंतर सुगन्धित होता रहता है।  फिर एक बार प्रस्तुत हैं , कुछ नए ताजा फूल आपकी सेवा में ; एक नए गुलदस्ते के रूप में। फूलों की सुगंध लीजिये ! और सुगंध आगे भी बाँटिये ; अपने सभी इष्ट मित्रों को ये गुलदस्ता भेज कर ! जुड़े रहिये मुझसे ताकि मैं आपको निरंतर किसी न किसी रस का आनंद दे सकूँ ! हार्दिक धन्यवाद !

बुधवार, 24 अगस्त 2022

डरा डरा आदमी

हम हर वक़्त किसी न किसी डर के साये में जीते हैं ! क्या होता है वो अनजाना डर ? हमें डर होता है बस किसी न किसी आदमी का ! ये कविता उसी भय को बयां करती है !