Gadget

यह सामग्री अभी तक एन्क्रिप्ट किए गए कनेक्शन पर उपलब्ध नहीं है.

बुधवार, 9 जून 2010

इति भोपाल प्रकरणम !!!

सोचता हूँ
क्या वो बड़ी त्रासदी थी ,जो १९८४ में हुई थी
या फिर वो जो उसके बाद हुई है पच्चीस सालों में
उस त्रासदी में एक शहर चपेट में था , भोपाल
एक खतरनाक गैस का बुन गया जाल ,
जो रात भर में हजारों घरों में पहुंची
और सोये हुए इंसानों के फेफड़ों में
जहर बन के जा घुसी

जो खुशकिस्मत थे सोये रह गए
बाकी बच गए
एक खौफनाक जिंदगी जीने के लिए
हवा पानी मिटटी फसल पशु
सब कुछ जहर बन गया
दिसंबर दो का वो दिन कहर बन गया

लेकिन उसके बाद हुये  शुरू
सरकारी तमाशे
घडियाली आंसुओं के बीच
बटने लगे बताशे
जिसे पकड़ा जाना था उसी दिन
वो वारन एन्डरसन
भगा दिया गया सरकारी विमान में
पहुँच गया अपने वतन
आज वो मौज में है
कहीं छुप कर नहीं
अमरीका की नाक न्यू योर्क में

सरकार ने ले ली कमान
या समझो खोल दी दुकान
पीड़ितों को न्याय दिलाने की
दो लाख जन्मे अजन्मे बच्चे
आठ लाख वयस्क ,जो मर गए तीन दिसम्बर को
बारह लाख जो मरते रहे किस्तों में
और असंख्य जो अब भी चुका रहें किस्ते
मरने तक की

सरकार ने फाइल सलटा दी
सैन्तालिश करोड़ डॉलर लेकर
और बन गयी दिलदार दिलासे देकर
लेकिन वो पैसा गया कहाँ
विधवाओं की शुरुवाती पेंसन दो सौ रुपैये महीने में ?
कम आय वालों  का फ़ाइनल निपटारा  पंद्रह सौ रुपैये में ?
और आखिर में
मरने वालों का फुल और फ़ाइनल औसत बासठ हजार
न मर पाने वालों का पच्चीस हजार
सवा दस लाख क्लैमों में
आधे निपट गए बिन पैसों के
क्योंकि वो गरीब सिद्ध नहीं कर पाए
कि उनके भी दर्द थे बाकी आधे जैसों के

यह था सरकारी न्याय आर्थिक रूप से
और जो बचा था गैर-जिम्मेवारी का दंड
उसका भी फैसला आखिर हो ही गया
भोपाल की कचहरी में , आज दो हजार दस में
सरकार की मंशा का मसला
जाहिर हो ही गया
दो दो साल की सजा कुछ बड़े लोगों को
जो उन्हें होनी नहीं इस जीवन काल में
जमानत ,तारीखें, अपील होती रहेंगी हर हाल में


और इस सरकारी त्रासदी के अन - उत्तरित प्रश्न
किसने भगाया वारन एन्डरसन को
और फिर क्यों नहीं माँगा गया वो अमरीका से
किसने दबा दी इनक्वारी की फाइल
कहाँ गए बचे हुए हजार करोड़ रुपैये
क्या मिला पीड़ितों की प्रभावित नस्लों को
क्यों नहीं दण्डित हुआ कोई

त्रासदी यह है मित्रों !
इस देश में इंसान की कीमत बहुत सस्ती है
और उस से भी सस्ती हमारे नेताओं की मानसिकता .
इति भोपाल प्रकरणम !!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. Hats Off Dear!

    I simply fail to understand as to how the words flow to express in poetic form?

    I think you should go in for a compilation of all your works in a book form and I would love to see you presenting your poems from Stage of some Kavi Sammelan

    Shashi

    उत्तर देंहटाएं