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शनिवार, 12 जून 2010

दर्द को साथी बना कर देखिये

जिंदगी के ग़म भुला कर देखिये
दर्द को साथी बना कर देखिये

दूसरों के कष्ट को अपना समझ
एक क्षण भर तिलमिला कर देखिये

भूल कर अपनी व्यथाओं की चुभन
एक रोते को हंसा कर देखिये

अजनबी भी सामने आ जाये तो
दोस्ती से मुस्कुरा कर देखिये

ये जहाँ संगीतमय लगने लगेगा
कोई नगमा गुनगुना  कर देखिये

एक अँधेरे रास्ते पर भूल के डर
जोर से सीटी बजा कर देखिये

3 टिप्‍पणियां:

  1. सकारात्मक उर्जा और प्रेरणा देती अतिसुन्दर रचना...

    बड़ा अच्छा लगा पढ़कर...आभार आपका...

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  2. Short and sweet poem, could be quoted at some appropriate occasion or situation

    Shashi

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