Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

मुंबई ७/११/२००६

मुंबई
मेरा शहर मेरा दोस्त
मेरा सपना मेरा अपना
मेरा घर मेरा दफ्तर
मेरी सुबह मेरी शाम
मुंबई - मेरा जीवन

मुंबई- एक विशाल हथेली
जिस पर खिंची आड़ी तिरछी रेखाएं
एक है जीवन रेखा - वेस्टर्न रेल
दूसरी भाग्य रेखा - सेन्ट्रल रेल
दौड़ता है जीवन इन रेखाओं में
धडकता है दिल मुंबई का इन बाँहों में

फिर किसने की शरारत , मुंबई की आत्मा से
कौन शैतान है वो जो डरता नहीं परमात्मा से
किसने बिछाया बारूद इन पटरियों पर
कौन बैठा है मौत की गठरियों पर

खेल चूका वो दांव जिसे खेलना था
झेल चुके हम लोग जो कुछ झेलना था
सैकंडों लाशें , छितराए अंग , खून की नदियाँ
क्या यही लक्ष्य था ?
ये सब किस बात का था जरिया ?

लक्ष्य जो भी हो वो जीत नहीं पायेगा
उसका खौफ मुंबई की आत्मा को हरा नहीं पायेगा
इन हादसों से मुंबई नहीं हिलती
क्योंकि मुंबई जैसी आत्मा कहीं नहीं मिलती

दो चार ने गद्दारी की इस शहर में
लाखों लोग आगे आये इस कहर में
घायलों को कष्ट से बचाने के लिए
जख्मों पर मरहम लगाने के लिए

एक हादसा कुछ भी मिटा नहीं सकता
दिलों की दौलत को घटा नहीं सकता
दरिया के बीच अलसाया  सा मुंबई शहर
नफरतों की आग कोई मिसमे लगा नहीं सकता    

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