Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

रविवार, 27 नवंबर 2016

सर्जिकल स्ट्राइक




पाकिस्तान पर जो हुआ

वो सर्जिकल स्ट्राइक का रिहर्सल था

नवम्बर को जो हुआ वो असल था !



घर बैठे ही सब के यहाँ रेड पड़  गयी

डिनर पर न्यूज़ देखने वालों की भूख मर गयी

छापा टीवी पर बोल के ही मार दिया

दारु वालों का नशा  उतार दिया



उस रात लोग गिनते रहे हजार और पांच सौ के

छुपा कर जो बचाये थे मियां बीवी ने एक दुसरे  से

सब का वोलंटरी डिस्क्लोजर हो गया

बरसों की चोरी का एक्सपोजर हो गया



नोट के ढेरों को टेबल पे रख के

लगे सोचने यूँ माथा पकड़ के

इस माया को ठिकाने लगाएं कहाँ

जाए तो आखिर जाए कहाँ ?



नोटों पर ये जो दिखा  है

धारक को हजार पांच सौ देना लिखा है

इसमें अब लिखो एक सफाई

कंडीशन्स अप्लाई



ये नोट काला है या सफ़ेद - बताओ

इसपर कोई तो निशान लगाओ

जिससे भविष्य में तो बचाव रहे

जीवन में खिंचाव रहे



प्रधानमंत्री का उत्तर स्पष्ट है 

अगर तुम्हारे अंदर कपट है

तो है तुम्हारा नोट काला

वर्ना चाँदी सा उजाला



नोट काला या सफ़ेद नहीं होता है मित्र

काला या सफ़ेद होता  है चरित्र

अगर देश का हक़ मारा

तो फिर नोट नहीं है तुम्हारा



जीवन में परिवर्तन लाओ

पैसा चाहे जितना भी कमाओ

देश को उसका टैक्स चुकाओ

फिर चाहे मखन मलाई खाओ !

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