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मंगलवार, 15 मार्च 2011

इन्द्रधनुष जिंदगी


रंग से सजी दुनिया , इन्द्रधनुष जिंदगी
चित्रकार ईश्वर है , कैनवास जिंदगी

खुशियों का रंग लाल ,जैसे उडती गुलाल
जैसे खिलता गुलाब , मेहँदी रचती है लाल
जीवन की खुशियों से है मीठास जिंदगी

कुदरत का रंग हरा , ताजगी से है ये भरा
वर्षा में हरियाली , ढक लेती है ये धरा
सब्ज रंग खुशबु है , और सुवास जिंदगी

रंग सबसे चमकीला , सोने का रंग पीला
सूरज का , अग्नि का, तेज कितना दमकीला
तेज चेहरे पर हो तो प्रकाश जिंदगी

क्षितिजों के अन्दर है , ये नीला अम्बर है
कितनी गहराई है , नीलिमा समंदर है
मन जिसका छोर नहीं वो आकाश जिंदगी

है सुफेद रंग सदा , शीतल और शांत है
चन्द्र, दुग्ध , हिम जैसे , चांदनी निशांत है
स्निग्ध संगमरमर सी संगतराश जिंदगी

रंग एक गहरा है , रात जिसका चेहरा है
जिंदगी के रंगों पर , काल का ही पहरा है
काली अमावस के पास पास जिंदगी

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता.. लय में पढ़ गया एक सांस में .. कुछ पंक्तिया तो अदभुद बनी हैं और गहरा अर्थ लिए हुए हैं... जैसे
    "क्षितिजों के अन्दर है , ये नीला अम्बर है
    कितनी गहराई है , नीलिमा समंदर है
    मन जिसका छोर नहीं वो आकाश जिंदगी "

    अंतिम पंक्तियों में जीवन दर्शन का सार तत्व छुपा है...
    "रंग एक गहरा है , रात जिसका चेहरा है
    जिंदगी के रंगों पर , काल का ही पहरा है
    काली अमावस के पास पास जिंदगी"....

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  2. महेंद्र भाई , बहुत दिनोंबाद आज आपके ब्लॉग पर आना हुआ बहुत ही सुन्दर रंगों वाली कविता पढ़ी ,सभी रंगों को कैसे आपने जिंदगी की खूबसूरती से जोड़ दिया है विषय और भाषा पर आपकी खूब पकड़ है जिन्दगी के रंग कई रे साथी रे इसका हर रंग निराला है बहुत सुन्दर गहरी प्रेरक रचना

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