Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

दंश



विश्व से सम्बन्ध अपने , पर पडोसी क्रुद्ध क्यों है
देश सब कुटुम्ब हैं, सरहद पे लेकिन युद्ध क्यों है ?

भाइयों में बाँट होती , माँ बँटी इस देश में थी
दंश माँ के दर्द का ,अब तक गला अवरुद्ध क्यों है ?

कुछ गलत हरगिज़ हुआ था , जब लिया ये फैसला था
फैसले लेकर ग़लत भी , वो बने प्रबुद्ध क्यों है ?

कौन कहता है आज़ादी, मिल गयी हमको लडे बिन 
जो लड़ाई तब हुयी वो चल रही अविरुद्ध क्यों है ?

बन गए चाचा ,पिता वो , देश जब ये जल रहा था
जिनके दामन खून से लथपथ रहे वो शुद्ध क्यों है ?

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