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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

जीवन फिर महक उठेगा यह


माना  मुसीबतें  आई हैं
माना कि बदली छाई है
कुछ क्षण को अँधेरा भी है
दुखों ने यूँ घेरा भी है

आखिर ये रजनी जाएगी
इक नया सवेरा लाएगी
ये बदली भी खो जायेगी
अँधेरे को धो जायेगी

नव आशाएं फिर जागेंगी
और सब मुसीबतें भागेंगी
जीवन फिर महक उठेगा यह
कलरव सा चहक उठेगा यह  

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