Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

मंगलवार, 23 जून 2015

ऐ दरख्त यार !


कुछ बात कर , ऐ दरख्त यार !
चुपचाप क्यूँ , कमबख्त यार !

तू बचपन का साथी
अब पचपन का साथी
मैं कितना बड़ा हुआ
तेरा रुका हुआ है वक्त यार !

ऋतुएँ आती जाती
तुझ पर है बरसाती
कभी धूप कभी बारिश
फिर भी तू कितना सख्त यार !

भूखे को  फल देता
गर्मी का हल देता
तेरे आँचल के नीचे
कटता सबका है वक्त यार !

आ तुझसे लिपट जाऊं
छाती से चिपट जाऊं
सारे रिश्ते हैं झूठे
सच्चा है तू बस फ़क्त यार !

शनिवार, 20 जून 2015

योग आखिर क्या है













योग कोई  धर्म नहीं
योग कांड  कर्म नहीं
योग अर्चना नहीं
योग वंदना नहीं !

योग सीमित भी  नहीं
योग परिमित भी नहीं
योग देश का नहीं
योग परदेस का नहीं !

योग सृष्टि ज्ञान है
योग मानव गान है
योग एक साधना
योग तन आराधना !

योग तन नैरोग्य है 
योग तो आरोग्य है
योग तन का स्वास्थ्य है
योग मन का स्वास्थ्य है !

योग जीने की कला
योग साधन श्रृंखला
योग नित्य कर्म है
योग स्वास्थ मर्म है !

स्वास लेने की कला
स्वास तजने की कला
योग स्वच्छ रक्त है
योग रोग मुक्त है !

आत्म साथ  योग है
आत्मसात योग है
स्वयं साध्य योग है
स्व-आराध्य योग है !