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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

ईश्वर हमें शक्ति दे !

समय का एक खंड बीत गया
समय का अगला खंड शुरू हुआ
क्या यही नहीं होता
हर महीने , हर सप्ताह , हर दिन
हर घंटे हर मिनट हर क्षण !

समय यूँ  बीत रहा है
उम्र हर क्षण हार रही है
समय हर क्षण जीत रहा है
सूर्य बूढा नहीं होता
चाँद थकता नहीं है
बूढा होता है शरीर
थकता रहता यह तन

हर वर्ष हम नापते हैं
एक दूरी को
जो घट रही है निरंतर
हमारे जीवन
और हमारी मृत्यु के बीच

हम झुठलाते हैं एक  दूसरे को
ये कह कर कि
अगला वर्ष शुभ हो
एक क्षीणतर तन के साथ ?
हमारी दुआएं
कर्ण प्रिय भी नहीं लगती 
क्योंकि हम जानते हैं
की सब खोखली है !

हमारी सच्ची शुभकामना होती -
तुम्हारी सारी समस्याओं से लड़ने के लिए
ईश्वर तुम्हे और हौसला दे
अगले काल खंड में !
समय के साथ संघर्ष बढ़ता है
हमें चाहिए आशीर्वाद
अपने संघर्ष को जीतने का
न की नया वर्ष आने का
पुराना  वर्ष बीतने का !

ईश्वर हमें शक्ति दे !


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