Mahendra Arya

Mahendra Arya
The Poet

शनिवार, 15 सितंबर 2012

रोटी और लंगोटी

जनता ने कहा -
इतनी महंगाई है , कहाँ जाएँ
सरकार  ने कहा
भाड़  में जाओ
जनता ने कहा -
भीड़ में तो हैं , अब भाड़  में कैसे जाएँ

जनता ने कहा -
दो  रोटी भी नहीं मिलती
सर्कार ने कहा -
तो एक  खाओ
जनता ने कहा -
गेहूं चावल सब्जी सब महंगे हैं
सर्कार ने कहा -
बिस्कुट और केक खाओ

जनता ने कहा -
चूल्हा कैसे जलाएं
कोयला नहीं है
सर्कार ने कहा -
कोयला  तुम्हारे लिए नहीं है
तुम गैस जलाओ
जनता ने कहा -
गैस की भी तो सीमा  आपने तय कर दी 
सर्कार ने कहा -
एक दिन छोड़ कर जलाओ

जनता ने कहा -
आपने मल्टी ब्रांड रिटेल में
51 प्रतिशत विदेशी  निवेश  पारित कर दिया
सर्कार ने कहा -
अपनी हैसियत में रहो
रोटी और लंगोटी की बात करो
ये सब देश की जरूरी बातें हैं
तुम नहीं समझोगे

जनता ने गुस्से में  कहा -
अगला चुनाव कब है ?
सर्कार ने प्यार से  कहा -
ऐसी बातें क्यों करते हो बेटा ,
हम है न ?

















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