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मंगलवार, 24 जुलाई 2012

मेरे मित्र लिखो

आजकल
लिखना कम हो गया है ?
समय नहीं मिलता ?
समय तो पहले भी इतना ही था - दिन के चौबीस घंटे !
शब्द नहीं मिलते ?
फिर शब्दकोष किस लिए है !
भाव नहीं आते ?
वो तो लिखने बैठूंगा तब आयेंगे .
कोई बात नहीं है कहने को ?
बातों में दम नहीं है .
पढने वाले नहीं मिलते ?
इसकी चिंता तो कभी की ही नहीं
आखिर बात क्या है फिर , क्यों नहीं लिखते ?
क्यों मेरा सर खा रहे हो ?
बहुत परेशान हूँ , इसलिए नहीं लिखता
बहुत दुखी हूँ इसलिए नहीं लिखता
मन में पीड़ा है इसलिए नहीं लिखता
और क्या जानना चाहते हो ?

जानना नहीं चाहता ,
कुछ बताना चाहता हूँ ;
जीवन की परेशानियाँ ही तो लेख हैं
दुखों से ही तो कहानियां निकलती हैं
और पीड़ा तो कविता की गंगोत्री है
इसलिए मेरे मित्र लिखो
तुम्हारे लेख , तुम्हारी कहानियां
और तुम्हारी कवितायेँ ही
समाधान हैं तुम्हारी समस्याओं का !

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही अच्छी कविता... हर लेखक और कवि के सामने ये स्थिति अवश्य आती है...जब लिखना चाहते हैं पर लिख नहीं पाते....

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