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गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

तनहाइयाँ

रास्ते लम्बे नहीं , लम्बी हैं ये तनहाइयाँ
आदमी बौना मगर , लम्बी हैं ये परछाइयाँ

मन यूँ ही बस डूबता उतरा रहा हर लहर में
है किसी सागर से गहरी मन की ये गहराइयाँ

बेसुरा हर राग है मन में उदासी छा रही
मन दुखी तो बेसुरी लगती है ये शहनाइयां

कोई पत्ता भी नहीं हिलता हवा खामोश है
उमस तो घटती नहीं कितनी चले पुरवाइयां

1 टिप्पणी:

  1. mujhay is dil ke gahrayee ki inteha to nahi maloom..... lekin jis dil may itna dard bhara ho WOH DIL AAM TO NAHI'

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